काला धन बन रहा है आर्थिक आतंकवाद

काला धन से खतरे लगातार बढ़ते जा रहे हैं. कुछ साल पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार देश के वित्तीय संस्थानों में आतंकवादियों के पैसे लगे होने की बात कही थी. कई अन्य अध्ययनों से भी पता चला है कि काले धन का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने में किया जा रहा है. विदेशों में जमा काला धन आतंकियों को वित्तीय मदद के रूप में भारत में आता है. इन गंभीर खतरों के बावजूद सरकार सख्त कदम उठाने से पीछे हट रही है. अवैध कारोबार से अर्जित धन को आतंकवादी देश के वित्तीय संस्थानों में निवेश कर रहे हैं. आर्थिक आतंकवाद का यह स्वरूप आतंकवाद के मौजूदा स्वरूप से अधिक गंभीर है.

काला धन देश की अर्थव्यवस्था को खोखला कर रहा है. काले धन के प्रवाह से देश के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन गलत तरीके से हो रहा है. इसके प्रवाह से देश के लोगों की आय में असमानता बढ़ रही है. काले धन के प्रवाह से देश में भ्रष्टाचार काफ़ी बढ़ गया है. 1991 में आर्थिक उदारीकरण की नीति अपनाये जाने के बाद काला धन जीडीपी का 50 फ़ीसदी हो गया है, जबकि 50 के दशक में यह महज 3 फ़ीसदी था. काले धन की समानांतर अर्थव्यवस्था विकसित होने के कारण कर चोरी, स्मगलिंग, हवाला कारोबार और भ्रष्टाचार के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है. यही वजह है कि पहले के मुकाबले पिछले 20 सालों में घोटालों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है. हर्षद मेहता कांड, सत्यम घोटाला और आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाला और 2 जी मामला आदि इसी काले धन की देन हैं. कालेधन के लालच में नेता, अपराधी, व्यापारी और अधिकारी का गठजोड़ कायम हो गया. इससे माफ़िया गतिविधियों में तेजी आयी और वे बिना किसी डर के अपना साम्राज्य कायम करने लगे.

काले धन के बढ़ते प्रवाह से महंगाई बढ़ रही है. महंगाई का सीधा असर आम लोगों को प्रभावित कर रहा है. काले धन का प्रवाह बढ़ने की बड़ी वजह देश में भ्रष्टाचार को गंभीर समस्या नहीं मानना रहा है. काले धन के कारण ही आज अर्थव्यवस्था कई संकटों का सामना कर रही है. काले धन के प्रभाव के कारण कई वित्तीय धोखाधड़ी हुई और बीमार कंपनियों का बंद करना पड़ा.काले धन की वापसी से भारत की अर्थव्यवस्था का कायापलट हो सकता है. अगर काला धन देश की अर्थव्यवस्था में जोड़ दिया जाये तो स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी, बिजली आदि बुनियादी आवश्यकताओं को सहज ही पूरा किया जा सकता है. देश के करोड़ों लोग बुनियादी सुविधाएं पाने से वंचित है. इससे सामाजिक स्तर पर बिखराव की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. यह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है.